हजारीबाग: चौपारण प्रखण्ड के ग्राम पंचायत चयकलां में स्तिथ हजरत दूलाह शाह बाबा के दरबार में तीन दिवसीय उर्स मेला का आयोजन 3 अप्रैल से शुरू हो रहा है। जो 5 अप्रैल तक चलेगा। अराकीने उर्स कमेटी इसकी तैयारी में जोर शोर से जुटे हुए हैं। यह जानकारी कमिटी के पदाधिकारीयों ने दी। वहीं चयकला के मुखिया प्रतिनिधि मौलाना हेलाल अख्तर व पंसस प्रतिनिधि मो फैजान अजमेरी ने बताया कि उर्स के मौके पर पूरी रात महफ़िले समा अर्थात क़व्वालियों का कार्यक्रम आयोजित होता है जिसमें देश की मशहूर क़व्वाल पार्टियां सूफ़ियाना कलाम पेश करते हैं। और कव्वाल अपने गायन से जायरीन को सूफियाना रंग में रंग देते हैं।इसकी शुरुआत 3 अप्रैल से होगी। जहां 3 अप्रैल को कुरान ख्वानी का कार्यक्रम है । जिसमें बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, बंगाल, उड़ीसा और हैदराबाद के कई प्रख्यात इस्लामिक विद्वान , वक्ता और नात खां शिरकत करेंगे। इनमें पुर्व राज्यसभा सांसद व एम एल सी बिहार के गाजी ए मिल्लत अल्लामा मौलाना गुलाम रसूल बलियावी साहब, मौलाना सैयद कामरान हसीब साहब रामगढ़, नकीब जनाब जमाल अख्तर साहब पलामू , नातखां जाकिर इस्माइली साहब बहराइच यूपी, शोएब रजा वारसी साहब भदोही यूपी के अलावा इलाकाई सहित दर्जनों उलमा, शायर , नात खां , हाफिज, कारी, एवं मौलवी शामिल रहेंगे। तो वहीं 4 अप्रैल को यूपी बनारस के टीवी सिंगर कव्वाल इशतेयाक भारती और मुम्बई के कव्वाल शाह मुराद चिश्ती के बीच होगा तो वहीं 5 अप्रैल 2026 को टीवी सिंगर कव्वाल बदायूं यूपी के दिलबर मेराज औऱ मेरठ के टीवी सिंगर कव्वाल आसिफ़ मलिक के बीच सीधा मुकाबला होगा। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय उर्स मेले में बड़े बड़े राजनेताओं , समाजसेवियों सहित लाखों की भीड़ उमड़ती है। जिसमें हज़ारों की संख्या में दूकाने व मनोरंजन के साधन भी रहते हैं।
विगत 100 वर्षों से आयोजित हो रहा उर्स मेला
प्रखण्ड के चयकला में स्तिथ सूफी संत हजरत दूलाह फतह उद्दीन शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैहि का मजार स्तिथ है। जहां पर हर साल हिंदी कैलेंडर के दूसरे महीने वैशाख के एक से तीन तारीख़ तक दरगाह परिसर में उर्स मनाया जाता है। जिसमें झारखण्ड ही नहीं बल्कि दुसरे राज्यों से भी ज़ायरीन आते है। सभी धर्म तथा समाज के लोग बिना किसी भेदभाव के दरगाह पर हाज़िर होते हैं और श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। साथ ही कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग भी लेते हैं। विगत 100 वर्षों से यह स्थान सर्वधर्म सम्भाव तथा साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक बना हुआ है।

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