भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा के दौरान भद्रकाली मंदिर पहुंचे देवेंद्र नाथ महतो, पूजा-अर्चना कर भर्ती व्यवस्था पर साधा निशाना
जिप सदस्य प्रतिनिधि भरत साव के नेतृत्व में किया गया सम्मानित
*इटखोरी : भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा के दौरान देवेंद्र नाथ महतो इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर पहुंचे और मुख्य मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद अन्य देवालय में भी पुजा अर्चना किया । इस दौरान जिला परिषद प्रतिनिधि भरत साव के नेतृत्व में देवेंद्र नाथ महतो का स्वागत माँ भद्रकाली का स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया । मौके पर मुख्य रूप से राज्यस्तरीय कमंट्रेटर सह भद्रकाली महाविद्यालय के प्रो सुशील कुमार वर्मा, शिक्षक दिलीप कुमार, मुकेश साव, अनुज दांगी बृजेश कुमार समेत बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं शामिल थी । उनके आगमन पर जगह जगह छात्र छात्रों ने स्वागत किया । इस दौरान उन्होंने प्रेस वार्ता कर कहा कि भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा झारखंड के सभी जिलों तक पहुंचेगी। इसका उद्देश्य गांव-गांव जाकर युवाओं को परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना काम कर रहा है, लेकिन वे जनता के बीच जाकर युवाओं को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। महतो ने कहा कि झारखंड में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में कथित धांधली गंभीर समस्या बन चुकी है। उनका लक्ष्य ऐसा झारखंड बनाना है, जहां प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी हों और राज्य की पहचान प्रश्नपत्र लीक मुक्त प्रदेश के रूप में बने।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीबीआई जांच कराने से बच रही है और इस मामले में कई बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो छात्र सड़क पर उतरेंगे, चक्का जाम करेंगे और आर्थिक नाकेबंदी तक का रास्ता अपनाया जाएगा। देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि रांची में हुए छात्र आंदोलन में हम लोगों ने सभी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग रखी थी। लेकिन राज्य की हेमंत सोरेन सरकार अपने दागी मंत्रियों और घोटालेबाज चहेते अधिकारियों को बचाने के नियत से जांच नहीं कराना चाहती। उन्होंने कहा कि झारखंड में अब तक हुए कथित गड़बड़ियों में राज्य के मंत्रियों और वरीय अधिकारियों की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि सीजीएल और जेएसएससी के साथ-साथ जेपीएससी की विवादित परीक्षाओं को लेकर भी छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं और रद्द का मतलब हर हाल में रद्द ही होगा।

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