परिवार का इकलौता सहारा उजड़ा, ग्रामीणों ने पूछा- नाबालिग के हाथ में स्टेयरिंग किसने थमाया? जांच की मांग
कृष्णा कुमार कुशवाहा
हजारीबाग (चौपारण) : बरही अनुमंडल के चौपारण थाना क्षेत्र अंतर्गत भगहर में एक दर्दनाक हादसे में बालू लदे ट्रैक्टर के पलटने से नाबालिग चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान सेल्हारा गांव निवासी महाबीर भोक्ता के 17/18 वर्षीय पुत्र अनिल भोक्ता के रूप में हुई है। ट्रैक्टर बुढ़ियाडाबर निवासी कैलाश यादव का बताया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर अवैध बालू लेकर तेज रफ्तार में जा रहा था। भगहर के पास अचानक अनियंत्रित होकर पलटा और चालक अनिल ट्रैक्टर के नीचे दब गया। सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही चौपारण थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घर में पसरा मातम, इकलौता कमाने वाला था अनिल
अनिल की मौत की खबर सुनते ही सेल्हारा गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि अनिल गरीब परिवार से था और घर चलाने के लिए मजबूरी में ट्रैक्टर चलाता था।
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| मृतक |
ग्रामीणों के तीखे सवाल - जिम्मेदार कौन?
इस हादसे ने एक बार फिर अवैध बालू ढुलाई और नाबालिगों से भारी वाहन चलवाने की प्रथा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने पूछा: 17 साल के नाबालिग को ट्रैक्टर की स्टेयरिंग किसने दी? क्या ट्रैक्टर मालिक और बालू माफिया की कोई जिम्मेदारी नहीं? परिवहन, खनन और पुलिस विभाग क्या कर रहा है? क्षेत्र में रोज दर्जनों बालू लदे ट्रैक्टर दौड़ते हैं, कई नाबालिग चलाते हैं। फिर जांच क्यों नहीं? परिवार का भविष्य कौन देखेगा? घर का चिराग बुझ गया। मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई कब? "हादसे के बाद लीपापोती नहीं, रोकथाम चाहिए" स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू के अवैध कारोबार में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। उम्र और कागजात चेक होते, तो आज अनिल जिंदा होता एक ग्रामीण ने कहा।
प्रशासन ने शुरू की जांच
चौपारण थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। ट्रैक्टर मालिक की भूमिका, नाबालिग से वाहन चलवाने और अवैध बालू परिवहन के बिंदुओं पर जांच होगी। मोटर वाहन अधिनियम और खनन नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। ग्रामीणों की मांग अवैध बालू ढुलाई पर पूर्ण रोक लगे, नाबालिग चालकों से वाहन चलवाने वालों पर गैर-इरादतन हत्या का केस हो, मृतक के परिजनों को तत्काल सरकारी मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले क्षेत्र में स्थायी चेकपोस्ट बनाकर 24x7 जांच हो। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो अनिल जैसे कितने और गरीब घरों के चिराग बुझते रहेंगे।


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