कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण: राष्ट्रीय राजमार्ग-19 स्थित दनुआ घाटी में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को एक बार फिर घाटी में कई वाहन आपस में टकरा गए। बीते 12 घंटों के भीतर कुल 13 वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, जिसने इस मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण दनुआ घाटी में लंबा जाम लग गया। यात्री घंटों सड़क पर फंसे रहे और आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चौपारण थाना प्रभारी पंकज कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम को घंटों मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद जाकर यातायात बहाल हो सका।
गनीमत रही, बड़ा हादसा टला
इन हादसों में केवल तीन लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि कई वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। पुलिस का कहना है कि यदि वाहनों की गति अधिक होती या मौसम प्रतिकूल रहता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
विभाग की उदासीनता से आक्रोश लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद दनुआ घाटी में स्थायी सुरक्षा उपायों की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि "दुर्घटनाओं के बाद सिर्फ राहत-बचाव होता है, लेकिन कारणों को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया जाता। सड़क पर लगी रेड टेप की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर टकरा रहे हैं।"
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दनुआ घाटी को विभाग कब प्राथमिकता देगा? स्थानीय नागरिकों ने घाटी में वैज्ञानिक ढंग से सुरक्षा उपाय लागू करने, सड़क की तकनीकी जांच कराने और दुर्घटना रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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