साल तक की प्रक्रिया पहले जैसी, राज्य बनाएंगे एसओपी
धनबाद : यदि आप अपने बच्चे के जन्म या परिवार में किसी की मृत्यु का प्रमाणपत्र बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। भारत सरकार के महारजिस्ट्रार के नए नियमों के तहत, जन्म या मृत्यु के दो साल के भीतर प्रमाणपत्र नहीं बनवाया गया, तो बाद में इसके लिए कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। महारजिस्ट्रार के आदेश पर गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। बदलाव को 1 अक्टूबर से लागू कर दिया जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस स्तर के न्यायिक पदाधिकारी ऐसे आवेदनों की जांच करेंगे और मंजूरी देंगे। इस संबंध में राज्य सरकारों को एसओपी जारी करने को कहा गया है। उसके बाद ही स्पष्ट होगा कि दो साल पुराने मामलों में प्रमाणपत्र बनवाने की क्या प्रक्रिया होगी और इसके लिए आवेदकों को क्या-क्या कागजात देने होंगे। धनबाद समेत पूरे झारखंड में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होते ही नियम को सख्ती से लागू किया जा सकता है। बच्चे के जन्म या किसी की मृत्यु की स्थिति में जल्द से जल्द प्रमाणपत्र बनवा लें। दो साल बीत जाने पर कोर्ट की अनुमति से ही निगम या पंचायत से प्रमाणपत्र जारी हो सकेगा। इस संबंध में महारजिस्ट्रार का नया आदेश 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगा। राज्य सरकार को एसओपी जारी करना है।" राजीव कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी
बदलाव से यह होगा...
फर्जीवाड़ा रुकेगा, इस मुद्दे पर लोग गंभीर होंगे जिला सांख्यिकी विभाग के मुताबिक, बदलाव का उद्देश्य जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। अभी तक लोग वर्षों बाद भी हलफनामा देकर आसानी से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लेते हैं। इस कारण कई बार जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण में फर्जीवाड़ा भी किया जाता है। समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर रोक लगने की संभावना है। साथ ही, आम लोग भी प्रमाणपत्र के प्रति गंभीर होंगे। क्योंकि, उन्हें पता होगा कि अधिक देरी होने पर कोर्ट और वकील के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
अभी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का यह है नियम...
30 दिनों के अंदर अस्पताल से जारी जन्म प्रमाणपत्र के साथ निगम या पंचायत में आवेदन करना होता है। मृत्यु होने पर अस्पताल का प्रमाणपत्र व श्मशान की पर्ची के साथ आवेदन होता है। रिकॉर्ड के मिलान के बाद जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है।
30 दिनों से अधिक और 1 साल से कम इस स्थिति में भी आवेदन
निगम या पंचायत सचिव के पास ही करना होता है। शहरी क्षेत्र में सांख्यिकी विभाग और ग्रामीण इलाके में बीडीओ से अनुमोदन के बाद जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। 1 साल से अधिक नोटरी का शपथ पत्र, स्थानीय वार्ड जनप्रतिनिधि व आंगनबाड़ी सेविका के अनुमोदन, पड़ोस के दो लोगों की गवाही के साथ निगम या पंचायत सचिव के पास आवेदन किया जाता है। फिर एसडीओ कार्यालय के आदेश पर जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। एसडीओ कार्यालय में इसके लिए कार्यपालक दंडाधिकारी को अधिकृत किया गया है। दो साल के बाद के लिए अभी यही प्रक्रिया है।

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