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1935 के हुक्मनामा की प्रामाणिकता पर उठा सवाल: 11 वर्ष की आयु में कैसे मिला था भू-स्वामित्व का पट्टा?

कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण, प्रतिनिधि : बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने शनिवार को प्रेसवार्ता करमा मौजा के बहुचर्चित भूमि विवाद पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव द्वारा प्रस्तुत वर्ष 1935 के हुक्मनामा की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए संपूर्ण प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है पूर्व विधायक ने साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची के अनुसार राजदेव यादव के पिता ननकु महतो की तत्कालीन आयु लगभग 11 वर्ष आंकी गई है। ऐसी परिस्थिति में वर्ष 1935 में रामगढ़ रियासत द्वारा उनके नाम से तीन एकड़ भूमि का हुक्मनामा निर्गत होना विधि-सम्मत प्रतीत नहीं होता। 

उन्होंने कहा कि नाबालिग के नाम भू-पट्टा जारी होने की प्रक्रिया संदेहास्पद है और इसकी सघन जांच आवश्यक है।श्री अकेला ने द्वितीय बिंदु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि 1935 में ही उक्त भूमि का आवंटन हो चुका था, तो वर्ष 1955 में बिहार भूदान यज्ञ समिति द्वारा उसी भूमि का पुनः आवंटन संतोष भुईयां के दादा काली भुईयां के नाम किस आधार पर किया गया? उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि विवाद का निराकरण व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, अपितु राजस्व अभिलेख, खाता-प्लॉट, चौहद्दी एवं विभागीय अमीन से विधिवत मापी के आधार पर होना चाहिए।

बाउंड्री विवाद पर भी दिया स्पष्टीकरण अपने आवासीय परिसर की चहारदीवारी पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि यदि प्रशासन को यह प्रतीत होता है कि उक्त निर्माण सरकारी अथवा लोक निर्माण विभाग की भूमि पर है, तो विभागीय स्तर पर नापी कराई जाए। नापी में अतिक्रमण सिद्ध होने पर वे स्वयं निर्माण हटाने को तैयार हैं। इस अवसर पर पीड़ित किसान संतोष भुईयां ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें पैतृक भूमि से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है तथा भयादोहन किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। प्रेसवार्ता में कांग्रेस जिला महासचिव विकास गुप्ता, संतोष भुईयां सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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