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पूर्व विधायक का विस्फोटक आरोप -मोटी रकम लेकर छोड़ा जब्त ट्रैक्टर, क्या रेंजर कार्यालय में नीलाम हो रहा है हजारीबाग का जंगल?



हथिन्दर जंगल में वन भूमि पर जोत-कोड का मामला, दो दिन में रिहाई पर मचा सियासी भूचाल, वन विभाग की पूरी कार्यप्रणाली कठघरे में

कृष्णा कुमार कुशवाहा/चौपारण हजारीबाग

चौपारण। हजारीबाग के जंगल अब लकड़ियों से नहीं, नोटों की गड्डियों से नापे जा रहे हैं। हथिन्दर जंगल में वन भूमि पर जोत-कोड करते हुए पकड़ा गया ट्रैक्टर, जिसे वन विभाग ने बड़ी बहादुरी से जब्त किया था, वह महज 48 घंटे में रेंजर कार्यालय से ऐसे गायब हो गया जैसे कभी पकड़ा ही न गया हो। और इस गायब होने की कहानी का पर्दाफाश किया है पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूटा बम - मोटी रकम लेकर सौदा।

अपने आवास पर बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने सीधा और कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि - "वन विभाग ने मोटी रकम लेकर जब्त ट्रैक्टर को छोड़ दिया है।" उनका स्पष्ट आरोप है कि हथिन्दर जंगल में जो कार्रवाई दिखावे  लिए की गई थी, उसकी समाप्ति पर्दे के पीछे मोटी रकम के लेन-देन से हुई है। यह बयान अब केवल एक आरोप नहीं रहा, यह वन विभाग के माथे पर लगा एक बड़ा सवाल बन गया है।

जब आरोप लगा तो वन विभाग ने ओढ़ा वन पट्टा का झूठा कफन

जब इस मोटी रकम के आरोप पर वन विभाग के अधिकारियों से सवाल पूछा गया तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। घुमा-फिराकर कहा गया कि जमीन का वन पट्टा होने के कारण ट्रैक्टर छोड़ दिया गया।

यह कैसा न्याय है? यदि जमीन वैध थी तो जब्ती क्यों? और यदि अवैध थी तो मुक्ति कैसे? क्या वन पट्टा अब जंगल को जोतने और उजाड़ने का सरकारी पास बन गया है? दो दिन में कौन सा सत्यापन हो गया, कौन सी फाइल चली और किस वरीय अधिकारी ने इतनी जल्दी मुक्ति का आदेश दे दिया? जवाब किसी के पास नहीं।

रेंजर से लेकर वनपाल तक - पूरा तंत्र मोटी रकम लेकर चुप्पी साधने में माहिर

यह मामला केवल एक ट्रैक्टर का नहीं है। यह चौपारण, इटखोरी और हजारीबाग के पूरे वन परिक्षेत्र की हकीकत है। बिना रेंजर कार्यालय की सहमति के एक जब्त वाहन का दो दिन में छूटना असंभव है।

क्षेत्र में चर्चा आम है कि जंगल में चलने वाले प्रत्येक ट्रैक्टर, प्रत्येक ट्रक, बालू और लकड़ी के प्रत्येक अवैध कारोबार से एक मोटी रकम की बंदरबांट होती है। दिन में वर्दी का खौफ दिखाया जाता है और रात में उसी वर्दी की छाया में मोटी रकम लेकर जंगल को नष्ट करने की खुली छूट दे दी जाती है।

युवा सोच का सीधा सवाल वन विभाग से - पूर्व विधायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो मोटी रकम के लेन-देन का आरोप लगाया है, क्या विभाग उसकी जांच कराने को तैयार है? हनिन्दर मामले में ट्रैक्टर को छोड़ने का लिखित आदेश किसने दिया और किस आधार पर दिया, वह सार्वजनिक किया जाए। पिछले एक साल में चौपारण रेंज में कितने वाहन जब्त हुए और कितने मोटी रकम लेकर छोड़े गए, उसकी सूची जारी हो। सरकार वन बचाने की बात करती है और नीचे बैठे लोग मोटी रकम लेकर वन को बिकवा रहे हैं। यदि वन की रखवाली करने वाले ही मोटी रकम लेकर वन का सौदा करने लगें, तो जंगल बचेगा कैसे?

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