Hot Posts

6/recent/ticker-posts

ब्रजेश गंझू उर्फ सरदार के मारे जाने से टीएसपीसी को बड़ा झटका, नेतृत्व संकट गहराया

आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद से ही कमजोर पड़ रहा था संगठन

कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चतरा : जिले में लंबे समय तक भाकपा माओवादी और टीएसपीसी के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती रही। माओवादियों की गतिविधि कमजोर पड़ने के बाद टीएसपीसी ने कई इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। लेवी और दहशत के बल पर संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा, लेकिन पुलिस-सीआरपीएफ के लगातार संयुक्त अभियान ने उसकी कमर तोड़ दी। अब संगठन के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ सरदार उर्फ गोपाल सिंह भोगता के मारे जाने से टीएसपीसी को सबसे बड़ा झटका लगा है। इससे पहले सेकेंड इन कमांड आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद संगठन शीर्ष नेतृत्व के संकट से जूझ रहा था।आक्रमण की गिरफ्तारी से लगा था पहला बड़ा झटका टीएसपीसी के सेकेंड इन कमांड माने जाने वाले आक्रमण गंझू उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ नेताजी को फरवरी 2025 में हंटरगंज थाना क्षेत्र के पतसुगिया पुल के पास से गिरफ्तार किया गया था। उस पर 18 लाख रुपये का इनाम था, जिसमें 15 लाख राज्य सरकार और 3 लाख एनआईए का इनाम शामिल था। 

चतरा, पलामू, लातेहार, हजारीबाग सहित कई जिलों में उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से अमेरिकन एम-16 ए-1 राइफल, एसएलआर, पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किया था। कई टॉप कैडर पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार लगातार अभियान में कोहराम, भीखन जैसे कुख्यात उग्रवादी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। मुकेश गंझू ने आत्मसमर्पण किया, जबकि कई उग्रवादी मुठभेड़ में मारे गए। जुलाई 2026 में चतरा पुलिस ने टीएसपीसी के नरेश गंझू को भी गिरफ्तार किया था।लंबे समय से भूमिगत था सरदार ब्रजेश गंझू लंबे समय से भूमिगत रहकर संगठन चला रहा था। वह सीधे सामने नहीं आता था, लेकिन अलग-अलग नामों से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर संगठन की गतिविधि दिखाता था। उसकी मौत के बाद टीएसपीसी का पुराना नेतृत्व ढांचा लगभग ध्वस्त माना जा रहा है।

टीपीसी से टीएसपीसी तक का सफर तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के रूप में माओवादी संगठन से अलग होकर बने इस संगठन का नाम बाद में तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) हो गया। चतरा, पलामू, लातेहार इसकी मुख्य गतिविधि वाले जिले रहे हैं। अमेरिकी हथियार से भी रहा चर्चा में आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के दौरान बरामद एम-16 राइफल पर 'प्रॉपर्टी ऑफ यूएस गवर्नमेंट' लिखा होने की बात सामने आई थी, जिसके बाद संगठन के पास विदेशी हथियारों की सप्लाई को लेकर भी जांच तेज हुई थी। लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और अब शीर्ष नेतृत्व के खात्मे के बाद चतरा सहित आसपास के जंगली इलाकों में टीएसपीसी का प्रभाव लगातार सिमटता जा रहा है।

Post a Comment

0 Comments