कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग)। ग्रामीणों की सामूहिक पहल किसी जगह की तस्वीर कैसे बदल सकती है, इसका उदाहरण बसारिया पंचायत के अमझर गांव में देखने को मिला। गांधी एवं शास्त्री जयंती के अवसर पर ग्रामीणों ने मुक्ति धाम परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए करीब तीन एकड़ भूमि की घेराबंदी कर 221 पौधे लगाए।
खास बात यह रही कि पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था की गई। पूरे परिसर को लोहे के एंगल और तार की जाली से घेरा गया है, ताकि पौधों को पशुओं से बचाया जा सके। आयोजित पौधारोपण अभियान में ग्रामीणों ने श्रमदान कर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिसर में मुख्य रूप से 200 महोगनी के पौधे लगाए गए। इसके अलावा 21 आम, अमरूद सहित औषधीय पौधे भी लगाए गए। ग्रामीणों का उद्देश्य मुक्ति धाम परिसर को आने वाले वर्षों में एक हरे-भरे और सुंदर स्थल के रूप में विकसित करना है।
सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बचाने की भी तैयारी
अक्सर पौधारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और देखभाल की कमी के कारण अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। अमझर के ग्रामीणों ने इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए पहले ही परिसर की घेराबंदी कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पौधा लगाना पहला कदम है, उन्हें पेड़ बनने तक बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों की एकजुटता बनी ताकत
अभियान में जयकरण ठाकुर, मनोज रजक उर्फ ग्रामीण मुखियाजी, सतीश यादव, सोबरन यादव, वीरेंद्र यादव, वीरेंद्र रवि, शंकर ठाकुर, अनिल देव, महेंद्र रजक, सुरेश रजक, पंकज रजक, अर्जुन रवि, चंदु रजक, लालचंद रजक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने कहा कि मुक्ति धाम परिसर को केवल अंतिम संस्कार स्थल तक सीमित रखने के बजाय इसे हरियाली से जोड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी होगा। महोगनी, आम, अमरूद और औषधीय पौधों के बड़े होने के साथ परिसर का वातावरण भी बदलने की उम्मीद है। पौधारोपण अभियान की जानकारी मिलने पर क्षेत्र के मुखिया, वार्ड सदस्य, विधायक, सांसद सहित विभिन्न संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के लोग मिलकर प्रयास करें तो गांव स्तर पर भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

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