चौपारण के डेबो पंचायत की हृदयविदारक घटना, ओझाओं के चक्कर में परिजनों ने गंवाया लाल
कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग) : प्रखंड के डेबो पंचायत में अंधविश्वास के कारण एक मासूम की जान चली गई। सर्पदंश के पश्चात परिजनों द्वारा तत्काल चिकित्सकीय उपचार के स्थान पर स्थानीय ओझाओं से लगभग 12 घंटे तक झाड़-फूंक कराई गई। किंतु सारे प्रयास निष्फल रहे और मासूम को बचाया नहीं जा सका। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डेबो पंचायत अंतर्गत एक गांव में बच्चे को विषैले सांप ने डंस लिया। घटना के उपरांत परिजनों ने उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के माध्यम से उपचार का प्रयास किया। स्थानीय ओझाओं ने दावा किया कि तंत्र-मंत्र से विष का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। इसके पश्चात बच्चे को कीचड़ में दबाकर, प्लास्टिक में लपेटकर विभिन्न अंधविश्वासी क्रियाएं की गईं। 12 घंटे तक चलता रहा जीवन-मृत्यु का खेल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ओझाओं द्वारा लगभग 12 घंटे तक अनवरत झाड़-फूंक की प्रक्रिया जारी रही। इस अवधि में बच्चे की स्थिति निरंतर गंभीर होती गई। जब तक परिजनों को वास्तविकता का पता चला तब तक बहुत विलंब हो चुका था। अंततः मासूम ने दम तोड़ दिया। घटना के पश्चात संपूर्ण क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: एंटी-स्नेक वेनम ही संजीवनी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक नहीं, अपितु तत्काल एंटी-स्नेक वेनम (ASV) का प्रयोग ही जीवन रक्षक है। 'गोल्डन ऑवर' अर्थात प्रथम एक घंटे में यदि पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दिया जाए और ASV उपलब्ध करा दिया जाए तो 99% मामलों में जीवन बचाया जा सकता है। झाड़-फूंक के चक्कर में बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है जिससे विष संपूर्ण शरीर में फेल फेल जाता है। फिर उजागर हुई ग्रामीण जागरूकता की कमी इस मर्मांतक घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त अंधविश्वास और समय पर चिकित्सकीय सुविधा के अभाव की गंभीर समस्या को पुनः उजागर कर दिया है। प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर जागरूकता अभियान संचालित किए जाने के बावजूद लोग आज भी ओझा-गुनी के चक्र में फंसकर अपने प्रियजनों की जान गंवा रहे हैं। इस घटना के पश्चात क्षेत्र में अंधविश्वास के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने तथा वैज्ञानिक उपचार पद्धति अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

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