सांसद और विधायक जन अपेक्षाओं की कर रहे घोर उपेक्षा-पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला 

 कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण (हजारीबाग): बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने सोमवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में बरही विधायक मनोज कुमार यादव और हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल पर जमकर निशाना साधा,उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायक कार्यकाल में स्वीकृत कराई गई विकास योजनाओं का शिलान्यास कर वर्तमान जनप्रतिनिधि जनता के बीच श्रेय लेने की राजनीति कर रहे हैं, जबकि क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

पूर्व विधायक ने कहा कि जिन योजनाओं की स्वीकृति, प्रशासनिक प्रक्रिया उनके कार्यकाल में रखी गई थी,आज उन्हीं योजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें अपनी उपलब्धि बताया जा रहा है। जबकी इन योजनाओं की निविदा 30/12/24 को अखबार मे निकाली गई थी। तो डेढ़ साल तक इन योजनाओं को क्यों दबाया गया, ताकी ये लोग इन योजनाओं का श्रेय ले सके। उन्होंने आगे कहा कि जनता को गुमराह करने के बजाय यह बताया जाना चाहिए कि इन योजनाओं को क्षेत्र में लाने के लिए किसने प्रयास किया था।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों पर राजनीति करने के बजाय जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी चाहिए। उमाशंकर अकेला ने कहा कि आज क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली है। दनुआ घाटी जैसे दुर्घटना संभावित जोन में अब तक ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और चिकित्सकों की अनुपस्थिति से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से मिलेंगे।प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भगहर क्षेत्र में कथित अवैध शराब कारोबार पर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने आरोप लगाया कि भगहर क्षेत्र में किसके संरक्षण मे खुलेआम अवैध शराब का धंधा चल रहा है और विधायक के आदमी इस कार्य को कर रहें हैं,और इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।बालू उठाव के मुद्दे पर पूर्व विधायक ने स्थानीय विधायक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू का उठाव किया जा रहा है, लेकिन इसकी निगरानी और जवाबदेही तय नहीं हो रही है।

आखिर यह बालू उठाव का कार्य किसके संरक्षण मे चल रहा है ।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस पूरे मामले की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि विधायक को इस विषय पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, लेकिन विभाग मौन बना हुआ है।

मै डीएफओ मौन प्रकाश से भी बात किया हूं,ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।उन्होंने झारखंड बिहार सीमा पर लगने वाले भीषण जाम और वाहनों से कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉर्डर क्षेत्र में व्यवस्था सुधारने के बजाय अव्यवस्था बढ़ती जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी अवगत कराया गया है। उन्होंने मांग की कि सीमा क्षेत्र में तैनात कर्मियों का नियमित रूप से स्थानांतरण किया जाए और जो बॉडर प्रभारी है उन्हें हर सात दिन में चेंज करे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और शिकायतों पर रोक लग सके।

पूर्व विधायक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज को बुलंद करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर पहल नहीं की गई तो वे जनता के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।प्रेस वार्ता में 20 सूत्री अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, पूर्व प्रखण्ड अध्यक्ष मंटू यादव, पूर्व विधायक प्रतिनिधि रामफल सिंह, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि टुन्नु बरनवाल, मनोज सिंह, महेश केशरी, मतीन खान, जीतू यादव, सहित दर्जनों  कार्यकर्ता उपस्थित थे।