कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण : चौपारण प्रखंड के जाने-माने पीडीएस डीलर और भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता नेमीचंद दांगी (55) का इलाज के दौरान निधन हो गया। मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।जानकारी के अनुसार अचानक तबीयत बिगड़ने पर वे घर पर ही गिर पड़े। परिजन तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौपारण लेकर पहुंचे। जांच में ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर कर दिया। बताया जाता है कि परिजन निजी वाहन से हजारीबाग ले जा रहे थे।
रास्ते में हालत और बिगड़ गई और वे अचेत हो गए। घबराए परिजन वापस चौपारण अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पर विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया में विशेष सतर्कता जरूरी है। ऐसे मामलों में एम्बुलेंस, ऑक्सीजन और जरूरी चिकित्सकीय निगरानी मरीज के साथ रहनी चाहिए। इधर, घटना के बाद अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मरीज का प्रारंभिक इलाज किस स्तर पर हुआ, गंभीर स्थिति का आकलन कैसे किया गया और रेफरल प्रक्रिया में सभी मानकों का पालन हुआ या नहीं, इस पर चर्चा तेज है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले भी विवादों में रहा है। नेमीचंद दांगी की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि गंभीर मरीज के पहुंचने पर उपलब्ध संसाधन कितने प्रभावी हैं। हर बार घटना के बाद स्पष्टीकरण आता है, लेकिन सवाल वहीं रह जाते हैं। फिलहाल मौत के वास्तविक कारण और इलाज की परिस्थितियों पर आधिकारिक बयान आना बाकी है। लेकिन इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर जनता के मन में मौजूद शंकाओं को फिर से हवा दे दी है। अब नजर इस पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
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