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कुएं के पास लटके मौत के तार! बच्ची को बचाने में पिता की गई जान, 5 झुलसे



कृष्णा कुमार कुशवाहा

चौपारण :  थाना क्षेत्र के ग्राम ब्रहमोरिया में सोमवार को बिजली विभाग की लापरवाही ने एक घर की दुनिया उजाड़ दी। कुएं के पास लटके 11 हजार वोल्ट के जर्जर तार की चपेट में आने से नरेश भुइया(48 वर्ष ) की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं बच्ची और दो महिलाओं समेत 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।  

बेटी को बचाने दौड़े तो खुद चपेट में आ गए। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी ईशा कुमारी (8 वर्ष) घर के पास स्थित कुएं के पास खेल रही थी। इसी दौरान ऊपर से लटका बिजली का तार उसके शरीर से छू गया और वह जोर से चीख पड़ी।  

बेटी की चीख सुनकर पिता नरेश भुइया दौड़कर उसे बचाने पहुंचे। उन्हें बचाते-बचाते परिजन भी एक-एक कर करंट की चपेट में आ गए। पल भर में खुशियों से भरा घर मातम में बदल गया।  

अस्पताल में तोड़ा दम घटना के बाद ग्रामीणों ने आनन-फानन में सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चौपारण पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद नरेश भुइया को मृत घोषित कर दिया।  

डॉ. डीएन ठाकुर, डॉ. पुष्पा कुमारी और डॉ. मनोज गुप्ता की देखरेख में अन्य घायलों का इलाज चल रहा है। एक घायल की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है।  

घायलों की सूची- 

रीना देवी, 45 वर्ष - पत्नी नरेश भुइया, ईशा कुमारी, 8 वर्ष - पुत्री नरेश भुइया, कुंजियां देवी, 50 वर्ष - पत्नी देवकी भुइया, भुनेश्वर भुइया, 60 वर्ष - पिता स्व. नारायण भुइया, एक अन्य - हजारीबाग रेफर  

"बार-बार शिकायत की, कोई सुनवाई नहीं हुई" - ग्रामीण के बीच

इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि कुएं के पास से गुजर रहे बिजली के तार कई महीनों से जर्जर और लटके हुए थे। इसकी शिकायत कई बार बिजली विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।  

ग्रामीणों ने कहा - "अगर समय रहते तार बदले जाते तो आज एक बाप अपने बच्चे को बचाने के चक्कर में अपनी जान नहीं गंवाता।" लोगों ने मृतक के परिजनों को मुआवजा देने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अंचलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।  

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।

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