Ranchi: झारखंड की सियासत में इन दिनों वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर का एक फैसला चर्चा का केंद्र बना हुआ है. उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षा गार्ड और 3 सरकारी एस्कॉर्ट वाहनों को राज्य सरकार को वापस कर दिया है. मंत्री का यह कदम न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर भी एक बड़ी हलचल पैदा कर चुका है.
सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान
आमतौर पर वीआईपी सुरक्षा को लेकर सत्ता के गलियारों में होड़ मची रहती है, लेकिन राधा कृष्ण किशोर द्वारा सुरक्षा छोड़ने का यह निर्णय सबको हैरान करने वाला है. हालांकि मंत्री ने खुद मीडिया के सामने इस फैसले के पीछे के ठोस कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों की मानें तो यह कदम उनकी अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली और कुछ प्रशासनिक निर्णयों से उपजी गहरी नाराजगी का परिणाम है.
विपक्ष को मिला सरकार पर वार करने का मौका
जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, झारखंड के राजनीतिक समीकरणों में उबाल आ गया है. विपक्षी दल इसे सरकार के भीतर मचे आंतरिक कलह और असंतोष का जीवंत प्रमाण बता रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और खुद मंत्री का यह कदम सरकार के कामकाज पर सीधा प्रहार है. विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है.
बंगले पर रहेंगे सुरक्षा गार्ड
मंत्री के इस फैसले के बाद राज्य के पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है. सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) ने फिलहाल उन सुरक्षाकर्मियों को मंत्री के सरकारी आवास पर ही तैनात रहने का निर्देश दिया है. इसका अर्थ यह है कि सुरक्षा पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है, लेकिन मंत्री अब सड़कों पर किसी भी तरह के भारी-भरकम काफिले के बिना सामान्य तरीके से चल रहे हैं.

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