कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग) : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शासकीय संस्थान सोसाइटी के झारखंड प्रदेश संयोजक सह बरही विधानसभा सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जीवन अनमोल है और आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आत्महत्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिससे परिवार, समाज और पूरे समुदाय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। श्री साव ने कहा कि हमें आत्महत्या को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों और कलंक को दूर करना होगा। इस विषय पर खुले और संवेदनशील संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी हिचकिचाहट के मदद मांग सके। हमें चुप्पी और गलतफहमी से हटकर खुलेपन, सहानुभूति और सहयोग की ओर बढ़ना होगा।
उन्होंने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की स्थापना वर्ष 2003 में अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी। प्रतिवर्ष 10 सितंबर को यह दिवस आत्महत्या की रोकथाम के प्रति वैश्विक जागरूकता लाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। श्री साव ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए व्यवस्थागत परिवर्तन जरूरी है। इसमें साक्ष्य-आधारित रणनीतियों का विकास, गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच और संकटग्रस्त लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। इस अवसर पर हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में निराश न हों और समस्या के समाधान के लिए प्रयास करें।
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