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हनुमान मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

मंदिर निर्माण और एनएच-2 के कार्य में बाधा का दावा, अंचल अधिकारी से मांगे मूल दस्तावेज 

कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण (हजारीबाग) :  सिंघरावां गांव में हनुमान मंदिर की भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी को आवेदन सौंपकर मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि विवाद के कारण मंदिर निर्माण कार्य के साथ-साथ एनएच-19 के छह लेन चौड़ीकरण से जुड़ी प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, मौजा सिंघरावां के खाता संख्या 56, प्लॉट संख्या 1685 एवं 1686 का लगभग 15 डिसमिल भूमि पूर्व में चुल्हैया मसौमत पति गोपाल साव के नाम दर्ज था । ग्रामीणों का दावा है कि चुल्हैया मसौमत ने अपने जीवनकाल में उक्त भूमि हनुमान मंदिर के लिए मौखिक रूप से दान कर दी थी, जिसके बाद वहां मंदिर का निर्माण कराया गया। समय के साथ पुराना जर्जर हो जाने पर ग्रामीणों के सहयोग से पुनः मंदिर का निर्माण किया गया, जो वर्तमान में भी मौजूद है। ग्रामीणों ने अपने आवेदन में कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के छह लेन चौड़ीकरण के दौरान मंदिर की भूमि का अधिग्रहण हुआ था और भू-अर्जन से संबंधित पंचाट में भी उक्त भूमि का उल्लेख हनुमान मंदिर के नाम से किया गया था। इसके बावजूद मंदिर की शेष भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में कमलेश साव एवं विनोद साव सहित अन्य लोगों पर मंदिर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित लोग उक्त भूमि पर अपना दावा करते हैं और इसे अपने पूर्वजों की संपत्ति बताते हैं। हालांकि ग्रामीणों ने दावा किया है कि जब उनसे भूमि संबंधी मूल दस्तावेज और स्वामित्व के प्रमाण मांगे गए तो वे कोई स्पष्ट कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। ग्रामीणों ने प्रशासन को आगाह किया है कि भूमि विवाद के कारण गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने अंचल प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि से संबंधित मूल अभिलेखों की जांच कराने तथा वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। सिंघरावां के ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी के साथ-साथ उपायुक्त हजारीबाग, जिला भूमि अपर समाहर्ता एवं अनुमंडल पदाधिकारी बरही को भी आवेदन की प्रतिलिपि भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि मामले का शीघ्र समाधान होने से मंदिर निर्माण कार्य तथा एनएच-19 से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब ग्रामीणों की नजर अंचल प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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