- "विधवा बहनों को सहानुभूति नहीं, सम्मान और सहयोग चाहिए": पूर्व मुखिया पूर्णिमा देवी की सरकार से विशेष विधेयक की मांग
- अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस पर झापा में महिलाओं की बैठक, 4 करोड़ भारतीय विधवाओं के संरक्षण के लिए संसद में विधवा संरक्षण विधेयक लाने की उठी आवाज
कृष्णा कुमार कुशवाहा
हजारीबाग : "विधवा बहनों को समाज से सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान और सहयोग चाहिए।" यह बात ग्राम पंचायत झापा की पूर्व मुखिया एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन, झारखंड प्रदेश कार्य समिति सदस्य पूर्णिमा देवी ने अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस के अवसर पर आयोजित महिलाओं की एक बैठक में कही।
पूर्णिमा देवी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 23 जून को मनाया जाता है। यह दिवस विधवा महिलाओं की समस्याओं के प्रति समाज को जागरूक करता है और उनकी उपेक्षा व दिक्कतों को उजागर करता है। उन्होंने अफसोस जताया कि ज्यादातर नागरिक समाज संगठन भी समाज के इस उपेक्षित वर्ग की अनदेखी करते हैं।
उन्होंने बताया कि सभी उम्र, क्षेत्र और संस्कृति की विधवाओं की स्थिति को विशेष पहचान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 जून, 2011 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस की घोषणा की थी।
मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन
श्रीमती देवी ने कहा, "विधवाओं और उनके बच्चों से दुर्व्यवहार मानव अधिकारों का सबसे गंभीर उल्लंघन है और विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। दुनिया की लाखों विधवाओं को गरीबी, बहिष्कार, हिंसा, बेघर होना, बीमार स्वास्थ्य और कानून व रीति-रिवाजों में भेदभाव सहन करना पड़ता है।"
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि एक अनुमान के अनुसार 11.5 करोड़ विधवाएं गरीबी में रहती हैं और 8.1 करोड़ शारीरिक व सामाजिक प्रताड़ना का सामना करती हैं। अकेले भारत में लगभग 4 करोड़ विधवाएं रहती हैं, जिन्हें आमतौर पर समाज से बहिष्कार जैसी स्थिति से गुजरना पड़ता है।
विधवा संरक्षण विधेयक की मांग
पूर्व मुखिया पूर्णिमा देवी ने भारत सरकार से विधवाओं के संरक्षण के लिए एक विशेष विधेयक की मांग की। उन्होंने कहा, "संसद के विशेष सत्र में विधवाओं की सहायता के लिए एक 'विधवा संरक्षण विधेयक' लाया जाए, ताकि विधवा बहनों को समाज में समुचित सम्मान मिल सके।"
बैठक की अध्यक्षता छोटा नागपुर सांस्कृतिक संघ की सचिव साची कुमारी ने की, जबकि संचालन पूर्व मुखिया वीणा देवी ने किया।
इस अवसर पर कविता देवी, अंगिरा देवी वर्मा, आशा कुमारी, निर्मला देवी, सविता देवी, सरिता देवी, रीता देवी, सुनैना देवी, दुलारी देवी, कर्मी देवी, कंचन देवी, ऊषा देवी सहित कई महिलाएं उपस्थित थीं।
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