इंगुनिया के विवेक चंद्रवंशी की सफलता से पूरे हजारीबाग में खुशी की लहर, साधारण परिवार से निकलकर छुआ वैश्विक शिखर
कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग)। सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की जाती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है चौपारण प्रखंड के इंगुनिया गांव के प्रतिभाशाली युवा विवेक चंद्रवंशी ने। अपनी लगन, प्रतिभा और अथक परिश्रम के बल पर विवेक ने दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी अमेज़न (Amazon) में लगभग 50 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर चयनित होकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले और प्रखंड का नाम रोशन किया है।
साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण सफलता विवेक के पिता आशीष चंद्रवंशी हजारीबाग भवन निर्माण विभाग में कार्यरत हैं, जबकि बड़े पिता करुणा चंद्रवंशी सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर विवेक ने यह साबित कर दिया कि सफलता संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की मोहताज होती है।
विवेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दयानंद विद्यालय, हजारीबाग से प्राप्त की। इसके बाद सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल, चौपारण से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और इसी वर्ष बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही उनकी प्रतिभा और समर्पण ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
गांव में जश्न का माहौल
विवेक की इस उपलब्धि से पूरे जिले और प्रखंड में खुशी की लहर है, लेकिन सबसे अधिक खुशी उनके पैतृक गांव इंगुनिया में देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आज विवेक ने अपनी उपलब्धि से इंगुनिया गांव को नई पहचान दिलाई है। जिस गांव का नाम पहले सीमित दायरे तक ही जाना जाता था, आज वही गांव विवेक की सफलता के कारण चर्चा के केंद्र में आ गया है। गांव के युवाओं के लिए वह प्रेरणा बन गए हैं और उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने का हौसला देगी।
बधाइयों का तांता विवेक की इस सफलता पर सांसद मनीष जायसवाल, विधायक मनोज यादव, पूर्व विधायक उमा शंकर अकेला, राम लगन सिंह, रामबृक्ष सिंह, सुनील चंद्रवंशी, राज किशोर शर्मा, राम प्रकाश सिंह, धनंजय सिंह, शिव कुमार सिंह, सुबोध सिंह, आशुतोष सिंह, अरविंद सिंह, मृत्युंजय सिंह, नवीन सिंह, व्यास चंद्रवंशी, भागवत सिंह, राम सेवक सिंह, दिनेश शर्मा, सुबोध ठाकुर, सपन चंद्रवंशी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
विवेक की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य ऊंचा हो और मेहनत सच्ची हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी वैश्विक मंच पर सफलता का परचम लहराया जा सकता है।
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