Mumbai: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) के एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान मोहन भागवत ने हाल ही में छात्रों-युवाओं के विरोध-प्रदर्शन, बेरोजगारी, आरक्षण, सोशल मीडिया बैन की चर्चा, LGBTQIA+, समलैंगिक विवाह और पाकिस्तान व चीन के साथ भारत के रिश्तों जैसे मुद्दों पर अपनी राय दी। आइए जानते हैं कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इन सभी मुद्दों पर क्या-कुछ कहा है।
Gen-Z प्रदर्शन पर क्या बोले मोहन भागवत?
Gen-Z प्रदर्शन मोहन भागवत ने कहा कि "आंदोलन भी संवाद का ही एक तरीका है। Gen-Z की शिकायतें सही हैं और देश के एजुकेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत है। Gen-Z और Gen Alpha को लॉजिकल जवाब चाहिए। अब पहले जैसी बात नहीं रही कि बड़े जो कहेंगे उसे मान लिया जाए। उन्हें आंदोलन नहीं करना चाहिए, ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब वो कुछ बोल रहे हैं तो हमे सुनना चाहिए। Gen-Z प्रदर्शन के दौरान बातचीत में कमी रही है। उन्हें एन्टी नेशनल कैसे कह सकते हैं? सबसे इमानदार जेनरेशन Gen-Z और Gen Alpha है। वे हमारे अपने ही हैं, वे हमारी अगली पीढ़ी हैं। इसलिए उनके साथ अपनापन और संवाद का रिश्ता होना चाहिए।"
क्या सोशल मीडिया पर बैन लगना चाहिए?
मोहन भागवत ने कहा कि "नियम बनाना और अनुशासन स्थापित करना आवश्यक है, लेकिन वे तभी सफल होते हैं जब लोगों का दृष्टिकोण और व्यवहार बदलता है। कानून तो बहुत बनाए गए हैं, लेकिन उनका प्रभाव तभी होता है जब समाज उन्हें स्वीकार करता है और उनका पालन करता है। समय के साथ रोल मॉडल भी बदलते हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि सोशल मीडिया पर उसके काम का अनुसरण लाखों लोग करते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके व्यवहार और संदेश का समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सोशल मीडिया का उपयोग करते समय हर जानकारी पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। किसी भी सूचना या वीडियो को सही मानने से पहले उसे विश्वसनीय और प्रमाणिक स्रोतों से सत्यापित करना आवश्यक है।"

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