कृष्णा कुमार कुशवाहा
चतरा : प्रत्येक वर्ष अवैध बालू खनन पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन की शिकायतें सामने आती हैं। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही कड़ी निगरानी की तैयारी की है। राज्य में सभी जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और जिला खनन पदाधिकारियों को एनजीटी नियमों को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत प्रशासन द्वारा नदी घाटों पर नियमित निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही ड्रोन, सीसीटीवी और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से भी निगरानी की जा सकती है।इस संदर्भ में अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन या परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ खनन अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बालू कारोबारियों के लिए चुनौतीपूर्ण समयचार महीने की बंदी बालू कारोबारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए भी चुनौती लेकर आई है।बालू खनन से जुड़े हजारों मजदूर, ट्रैक्टर चालक, ट्रक मालिक और अन्य लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं।
एनजीटी प्रतिबंध अवधि के दौरान इन लोगों की आय प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का पालन सभी को करना होगा। 15 अक्टूबर के बाद होगी समीक्षा खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 अक्टूबर के बाद मौसम और नदी की स्थिति की समीक्षा की जाएगी,यदि परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत बालू घाटों को फिर से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।हालांकि अंतिम निर्णय एनजीटी के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकार की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि कहीं अवैध बालू खनन या परिवहन की जानकारी मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की कोशिश विशेषज्ञों का कहना है कि बालू खनन पर मौसमी रोक पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।एक ओर जहां निर्माण गतिविधियों के लिए बालू आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर नदियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।मॉनसून के दौरान खनन गतिविधियों पर रोक लगाकर सरकार और एनजीटी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रह सकें।
फिलहाल झारखंड में अगले चार महीनों तक सभी 444 बालू घाट बंद रहेंगे और प्रशासन अवैध खनन पर सख्त नजर रखेगा। अब सभी की निगाहें 15 अक्टूबर के बाद होने वाली समीक्षा पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि राज्य में बालू खनन गतिविधियां दोबारा कब शुरू होंगी।

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