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दनुआ घाटी में भीषण सड़क हादसा ,खून से लाल हुआ NH-19 | सरकार कब जागेगी?

 कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण (हजारीबाग) 17 जून 2026  दनुआ घाटी एक बार फिर लाशों के ढेर पर चीख रही है। जोड़राही पुल के पास देर रात चार वाहनों की भीषण टक्कर ने NH-19 को जाम कर दिया। एक ट्रेलर तो 20 फीट गहरी खाई में जा समाया। केबिन में फंसे चालक-खलासी की चीखें जब सिस्टम तक नहीं पहुंचीं, तब पत्रकार की खबर और चोरदाहा पिकेट प्रभारी नीतीश यादव की तत्परता ने कई जिंदगियां बचा लीं। हादसे का खौफनाक मंजर  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लोहे के परखच्चे उड़ गए। ट्रेलर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गया। कई वाहन चकनाचूर हो गए। केबिन में फंसे चालक-खलासी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन शुरुआती एक घंटे तक कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची। जब सिस्टम सोया, तब खाकी जागी  सूचना मिलते ही चोरदाहा पिकेट प्रभारी नीतीश यादव अपनी टीम के साथ मौके पर दौड़े। अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने केबिन में फंसे चालकों को बाहर निकाला। तत्काल NHAI की एंबुलेंस बुलाई गई और सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। अगर पुलिस की तत्परता न होती तो लाशों का आंकड़ा बढ़ सकता था। 

पत्रकारिता ने निभाया फर्ज ।तस्वीरें वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय मीडिया के दबाव के बाद ही क्रेन और अतिरिक्त फोर्स मौके पर भेजी गई। सवाल है: क्या हर बार जान बचाने के लिए पत्रकार को ही अलार्म बजाना पड़ेगा? सरकार और NHAI पर सीधा हमला मौत का ब्लैक स्पॉट: दनुआ घाटी में पिछले 2 साल में 17 बड़े हादसे हो चुके हैं। 30 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। फिर भी न स्पीड ब्रेकर, न क्रैश बैरियर, न चेतावनी बोर्ड। NHAI की नाकामी: सिक्स लेन का काम चल रहा है, लेकिन सुरक्षा जीरो है। रात में न लाइट, न रिफ्लेक्टर, न पेट्रोलिंग। प्रशासन की नींद: पल्स पोलियो की बैठक से अफसर गायब रहते हैं, और हादसे के वक्त रिस्पॉन्स टाइम 1 घंटे से ज्यादा। यह लापरवाही नहीं, आपराधिक गैरजिम्मेदारी है। जनता का सवाल, सरकार जवाब दो  दनुआ घाटी को ब्लैक स्पॉट घोषित कर तत्काल सुरक्षा ऑडिट कब होगा? रात में NHAI की पेट्रोलिंग और एंबुलेंस की तैनाती कब सुनिश्चित होगी? हर हादसे के बाद जांच कमेटी बनती है, रिपोर्ट कहां जाती है? कार्रवाई कब होती है? प्रशासन की सराहना, लेकिन सिस्टम पर चोट जरूरी  हम चोरदाहा पिकेट प्रभारी नीतीश यादव और उनकी टीम की तारीफ करते हैं। इन्होंने वर्दी का फर्ज निभाया। लेकिन कुछ ईमानदार अफसरों के भरोसे पूरा सिस्टम नहीं चल सकता। हजारीबाग डीसी और NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को जवाब देना होगा कि दनुआ घाटी कब तक मौत बांटती रहेगी?

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