कृष्णा कुमार कुशवाहा
हज़ारीबाग : सरकारी योजनाओं और युवाओं के भविष्य की बात करने वाली सरकार के मुंह पर करारा तमाचा। हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के बेंगा में स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी ITI आज भी वीरान पड़ा है।करीब 8 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से बना ये भव्य भवन 11 साल पहले बनकर तैयार हो गया था। लेकिन आज तक इसमें पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। न शिक्षक हैं, न छात्र हैं, न कोई मशीन। सिर्फ दीवारें और ताले सरकारी लापरवाही की कहानी सुना रहे हैं।वर्ष 2015 में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ इस ITI भवन का निर्माण पूरा हुआ था। उद्देश्य था कि क्षेत्र के युवा यहां तकनीकी शिक्षा लेकर रोजगार पाएं। लेकिन उद्घाटन के बाद ये परिसर सरकारी कागजों तक ही सीमित रह गया। एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संस्थान का संचालन शुरू नहीं हो सका।सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए आज तक एक भी गार्ड तैनात नहीं किया गया। स्थानीय ग्रामीण ही अपनी जिम्मेदारी पर भवन और उसमें रखी मशीनों की निगरानी कर रहे हैं। अगर कुछ चोरी हो गया या मशीन खराब हो गई तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
इस संस्थान के उद्घाटन से बेंगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन संस्थान बंद होने से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। निजी ITI की ऊंची फीस भरने में असमर्थ अनेक युवा तकनीकी शिक्षा से वंचित होकर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।योजना की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि भवन निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन आज तक पानी के लिए नल, शौचालय, फर्नीचर, बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। बरसात में नाले का पानी क्लासरूम में घुस जाता है।मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को कई बार शिकायतें भेजी गईं। हर बार जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ।जब भवन तैयार है, करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं और क्षेत्र के हजारों युवा तकनीकी शिक्षा के लिए तरस रहे हैं, तो आखिर ये ITI 11 साल से बंद क्यों है? क्या विकास सिर्फ भवन बनाने तक सीमित है? अगर युवाओं का भविष्य नहीं संवरना था तो इतना पैसा क्यों बर्बाद किया गया?सरकारी उदासीनता और योजनाओं की नाकामी का ये जीता-जागता सबूत है।
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