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करोड़ों की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश? पूर्व सीआई कार्यालय की जमीन पर बड़ा खुलासा


ग्रामीणों का दावा- दान की जमीन को निजी बनाने की हुई मिलीभगत, उच्चस्तरीय जांच की मांग 

कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण (हजारीबाग): चौपारण बस स्टैंड के समीप स्थित पूर्व सीआई कार्यालय की बहुमूल्य भूमि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सरकारी संपत्ति के स्वामित्व और हस्तांतरण पर उठे सवालों के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों ने नए दावे करते हुए पूरे मामले की न्यायिक अथवा उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है।"दान की थी जमीन, निजी हो गई" - ग्रामीण  ग्रामीणों का दावा है कि यह भूमि मूल रूप से नारो राणा के पूर्वजों की थी, जिसे तत्कालीन सीआई कार्यालय के संचालन के लिए दान स्वरूप दिया गया था। वर्षों तक यहां सीआई कार्यालय संचालित हुआ और सरकारी कर्मचारी निवास करते थे। परिसर में बने भवन इसके प्रमाण हैं।आरोप है कि बाद के वर्षों में कथित मिलीभगत से भूमि का नामांतरण निजी पक्ष के नाम करा दिया गया।"एकतरफा फैसले से हुआ नुकसान" ग्रामीणों के अनुसार भूमि विवाद का मामला न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन उस समय सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण निजी पक्ष को एकतरफा राहत मिल गई। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग मजबूती से अपना पक्ष रखता तो सरकारी संपत्ति का स्वरूप बरकरार रह सकता था।

पुराने रिकॉर्ड खोलेंगे राज स्थानीय लोगों का दावा है कि पुराने राजस्व अभिलेखों में यह भूमि बिहार सरकार के नाम दर्ज रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्तमान रिकॉर्ड, पुराने खतियान, जमाबंदी, रसीद, न्यायालयीन आदेश और अन्य सरकारी दस्तावेजों का मिलान कराया जाए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।ग्रामीणों ने आशंका जताई कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस भूमि पर भू-माफियाओं की नजर बनी हुई है।गरीब बस्ती पर पड़ेगा असर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई कि भूमि के पीछे बड़ी हरिजन बस्ती है, जहां हजारों लोग रहते हैं। यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की स्थिति बनती है तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब और कमजोर वर्ग पर पड़ेगा।जांच और कार्रवाई की मांग  ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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