धनबाद: इलाज के नाम पर लूट और फिर इंसानियत की मौत। बरटांड़ स्थित जलान अस्पताल में मरीज की मौत के बाद शव को बिल के लिए रोकने के आरोप ने अस्पताल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल पर जमकर हंगामा किया।
परिजनों के गंभीर आरोप
1. 4 लाख खर्च, फिर भी मौत: गिरिडीह निवासी _मिथलेश पासवान_ 20 जून को सड़क दुर्घटना में घायल होकर भर्ती हुए थे। परिजनों का दावा है कि 10 दिन के इलाज में करीब 4 लाख रुपये खर्च कर दिए, फिर भी जान नहीं बची।
2. दूसरे की रिपोर्ट पर इलाज: परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने किसी दूसरे मरीज की रिपोर्ट के आधार पर मिथलेश का इलाज किया। गलत इलाज से हालत बिगड़ती गई और मौत हो गई।
3. 50 हजार के लिए शव रोका: सबसे शर्मनाक आरोप ये कि मौत के बाद 50 हजार बकाया बिल के लिए अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया। मजबूरन परिजनों को हंगामा करना पड़ा।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
जलान अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अस्पताल का कहना है कि मरीज के सिर में गंभीर चोट थी। इलाज के दौरान संक्रमण बढ़ गया जिससे मौत हुई। हंगामे की सूचना पर पुलिस बुलाई गई और शव पुलिस को सौंप दिया गया।
पुलिस कर रही जांच
मामले की जांच धनबाद थाना पुलिस कर रही है। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जांच रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
*कोयलांचल क्राइम न्यूज़* इलाज के बाद मौत किस्मत हो सकती है, पर बिल के लिए लाश रोकना अपराध है। अगर गलत इलाज का आरोप सही है तो ये लापरवाही नहीं, हत्या है। प्रशासन को तुरंत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अस्पताल भगवान का दूसरा रूप कहलाए, यमराज का नहीं।

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