कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग)। त्याग, बलिदान और इंसानियत का पैगाम लेकर आया मुहर्रम इस बार चौपारण में सामाजिक समरसता की नई इबारत लिख गया। शनिवार को प्रखंड के गांव-मोहल्लों से निकले ताजिया जुलूस में मजहब की दीवारें टूट गईं और "नारा-ए-तकबीर" के साथ तिरंगा लहराकर कौमी एकता का अनूठा नजारा पेश किया गया।
भाईचारे के रंग में रंगा चौपारण
"या हुसैन, या शहीदे करबला" के नारों से गूंजते माहौल में अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को याद कर अकीदत के फूल और शीरनी पेश की। शाम होते-होते सभी जुलूस मुख्य मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचे। खास बात यह रही कि जुलूस में हर मजहब के लोग शामिल हुए और सामाजिक सौहार्द की मिसाल कायम की।
प्रशासन रहा मुस्तैद, नहीं हुई कोई अप्रिय घटना पर्व को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अंचल अधिकारी संजय यादव और थाना प्रभारी पंकज कुमार खुद पूरे दिन क्षेत्र में भ्रमण करते रहे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि आमजन के सहयोग से पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
लाठी-भाला से दिया एकता का संदेश पाण्डेयबारा पंचायत के कमलवार गांव में कौमी एकता क्लब के तत्वावधान में पारंपरिक लाठी-भाला खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। खिलाड़ियों ने हैरतअंगेज करतब दिखाकर अनुशासन और साहस का परिचय दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से ग्रामीणों ने उनका हौसला बढ़ाया।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने कहा, "मुहर्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम और समरसता मजबूत करते हैं।"
विशिष्ट अतिथि समाजसेवी जीतू यादव बोले, "लाठी-भाला हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इससे युवाओं को प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है और एकता की भावना प्रबल होती है।"
कार्यक्रम में रेवाली पासवान, अभिमन्यु भगत, रामफल सिंह, अब्दुल जब्बार, गुलबहार अंसारी, सरफराज, सद्दाम, शौकत, मेंहदी हसन सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

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