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पांडेबारा पैक्स में धान खरीद में बड़ा खेल। एक ही परिवार के नाम पर 100 से 250 क्विंटल धान, छोटे किसान लौटे बैरंग

जगदीशपुर निवासी ने डीसी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, निजी घर से धान लोड कर मिल भेजने का आरोप, वीडियो सबूत का दावा

कृष्णा कुमार कुशवाहा 

चौपारण (हजारीबाग)। चौपारण प्रखंड के पांडेबारा पैक्स में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान हुई धान की सरकारी खरीद पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर अलग-अलग किसान आईडी बनाकर बड़े पैमाने पर धान खरीद दिखाने का आरोप लगा है।

जगदीशपुर निवासी प्रवेश कुमार यादव ने इस संबंध में हजारीबाग उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीद की सरकारी योजना का दुरुपयोग किया गया है।

आरटीआई से हुआ खुलासा:

शिकायतकर्ता के अनुसार सहकारिता विभाग, हजारीबाग से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त सूची में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एक ही खतियान और एक ही परिवार के पिता, पुत्र, पत्नी, बहू के नाम पर अलग-अलग किसान आईडी बनाकर 100 से 250 क्विंटल तक धान की खरीद दर्शाई गई है, जबकि छोटे और वास्तविक किसानों को पैक्स से धान वापस लौटना पड़ा।

आरोपों की सूची - किस परिवार पर कितना धान:

शिकायत के अनुसार -

पवई (पाण्डेबारा): रामप्रताप सिंह उर्फ अशोक सिंह परिवार - पिता 45 क्विं., पुत्र पवन कुमार 48 क्विं., ज्वाला प्रताप 44 क्विं. - कुल 137 क्विंटल

पांडेबारा: बिरेन्द्र कुमार पांडे परिवार - 25, 38 और 50 क्विंटल - कुल 113 क्विंटल

पिपरा (जगदीशपुर): सबसे बड़ा मामला - दुलार साव 64, पत्नी कमली देवी 77.5, पुत्र राजकुमार 79.5, ओमप्रकाश गुप्ता 96.5 क्विंटल समेत कुल 555 क्विंटल धान खरीद दिखाने का आरोप

बेला-बिगहा: साकुन देवी, शेखर कुमार, रूपा कुमारी के नाम पर कुल 160 क्विंटल

बेला: तिलकी देवी, पुतुल देवी, उमेश महतो के नाम पर 266 क्विंटल तक

निजी आवास से लोडिंग का आरोप: सबसे गंभीर आरोप यह है कि पैक्स के निर्धारित गोदाम के बजाय जगदीशपुर पंचायत के पिपरा निवासी दुलार साव के निजी आवास से धान लोड कर मिल भेजा गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इसका वीडियो रिकॉर्डिंग उसके पास सुरक्षित है, जो जांच में प्रस्तुत किया जाएगा।

डीसी से जांच की मांग:

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सभी किसान आईडी, आधार, खतियान, भूमि का रकबा, वास्तविक उत्पादन और बैंक भुगतान का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही पैक्स अध्यक्ष, कर्मियों और नोडल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। दोषी पाए जाने पर FIR और सरकारी राशि की वसूली की मांग की गई है। बताया गया कि इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को भी दी गई है।

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