कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग) : प्रोत्साहन मानव जीवन की वह संजीवनी है, जिससे कर्म की इच्छाशक्ति और मनोबल दोनों को नई उड़ान मिलती है। राष्ट्रीय प्रोत्साहन दिवस के अवसर पर हिंदी साहित्यकार सह बरही विधानसभा के भाजपा नेता मुकुंद साव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय प्रोत्साहन दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अपने कर्मयोगियों, सहकर्मियों और समाज के प्रेरक व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का सुअवसर है। इस दिवस की परिकल्पना हमें सिखाती है कि एक छोटा सा प्रोत्साहन भी किसी के जीवन में बड़े परिवर्तन का कारण बन सकता है। इस दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए श्री साव ने बताया कि 2000 के दशक के प्रारंभ में अर्कांसस के सियरसी स्थित हार्डिंग विश्वविद्यालय में आयोजित एक नेतृत्व मंच में हाई स्कूल के कुछ छात्रों ने आज की युवा पीढ़ी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती के रूप में 'प्रोत्साहन की कमी' को चिह्नित किया था। नकारात्मकता के इस दौर में सकारात्मकता का दीप जलाने हेतु ही उन्होंने 'प्रोत्साहन दिवस' मनाने का संकल्प लिया।
12 सितंबर की तिथि का चयन भी अत्यंत चिंतनपूर्ण है। यह तिथि अमेरिकी इतिहास के सबसे मर्माहत करने वाले 11 सितंबर की घटना के ठीक अगले दिन आती है। छात्रों का मानना था कि निराशा के अंधकार के बाद आशा और प्रोत्साहन का प्रकाश फैलाना ही सच्ची मानवता है। इस विचार को सर्वप्रथम सियरसी की तत्कालीन मेयर बेलिंडा लाफोर्स ने 22 अगस्त, 2007 को अंगीकृत किया। तत्पश्चात अर्कांसस के तत्कालीन गवर्नर माइक बीबे ने 12 सितंबर को 'राज्य प्रोत्साहन दिवस' घोषित किया और उसी वर्ष तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने इसे 'राष्ट्रीय प्रोत्साहन दिवस' के रूप में मान्यता प्रदान की। अंत में श्री साव ने कहा कि - "जीवन में प्रगति का मूलमंत्र प्रोत्साहन ही है। जो व्यक्ति निष्ठापूर्वक अच्छा कार्य कर रहा है, उसे प्रोत्साहित करना हमारा नैतिक दायित्व है। एक शब्द का प्रोत्साहन भी किसी के पुरुषार्थ को शतगुना बढ़ा देता है।"

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