इटखोरी : चतरा जिले के इटखोरी के बहुचर्चित 'सेफ जोन हॉस्पिटल' को आखिरकार जिला प्रशासन ने सील कर दिया है। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चतरा से आई प्रशासनिक टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह कायम रही।गौरतलब है कि सोमवार देर रात परोका गांव निवासी 50 वर्षीय अशोक राम को पेट दर्द की शिकायत पर परिजन सेफ जोन अस्पताल लाए थे। परिजनों का आरोप है कि रात 1:30 बजे से सुबह 10 बजे तक अस्पताल में कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था। डॉक्टर के पिता रियाज मियां मरीज के परिजनों को "डॉक्टर बस आ रहे हैं" कहकर रोके रहे। सुबह एक नर्स द्वारा बिना डॉक्टर की मौजूदगी में इंजेक्शन लगाते ही मरीज की मौत हो गई थी।मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद इटखोरी थाना पुलिस और डीएसपी सुनील कुमार सिंह मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने डॉक्टर कुद्दुस, उनके पिता रियाज मियां और नर्स समेत 4 लोगों को हिरासत में लिया था।मामले के तूल पकड़ने और खबर प्रकाशित होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने अस्पताल को सील करने का आश्वासन दिया था।
प्रशासन ने लिया संज्ञान:
बुधवार को चतरा जिला प्रशासन की टीम इटखोरी पहुंची। अधिकारियों ने अस्पताल के कागजातों की जांच की और परिसर को सील करने की कार्रवाई पूरी की। मौके पर मौजूद लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि चंद रुपयों के लालच में चल रही ऐसी मौत की दुकानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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