हजारीबाग: नगर प्रेक्षागृह में कला, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का भव्य संगम देखने को मिला। 60 स्थानीय कलाकारों ने गीतों, नृत्यों और महाकाव्य कालजयी वंदे मातरम की यादों से दर्शकों का दिल जीत लिया।भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और जिला प्रशासन, हजारीबाग के सहयोग से संजय ग्रुप द्वारा आयोजित "राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव-2026" का भव्य आगाज किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों, दर्शकों एवं कलाकारों द्वारा संयुक्त रूप से वंदे मातरम गीत के साथ हुई।कार्यक्रम में बतौर अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अशोक कुमार, डॉ. सनिता सिंह, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी देवंती कुमारी, स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर मेहता, आशा फाउंडेशन की सचिव डॉ. अमला राणा, हजारीबाग भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सिंह, कला संस्कृति विद्यालय के प्राचार्य सुदेश सिन्हा, आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट के अध्यक्ष रामकिशोर साव, सचिव प्रदीप, संस्कार भारती के प्रांतीय महासचिव संजय श्रीवास्तव, हजारीबाग इकाई के अध्यक्ष कुमार केशव, सचिव विनीत जैन, आचार्य कौटिल्य, शैलेन्द्र यादव, परवेज खान, डॉक्टर श्रवण पांडे, हंसराज लोहरा, प्रवीण जायसवाल, फरहा खान, संतोष कुमार, दीपक सिन्हा, सच्चिदानंद पांडे, सुरेश कुमार, डॉक्टर भेजा असीम, मेघा अभिमन्यु, डॉ गीता गुप्ता के साथ अन्य सभी गणमान्य अतिथियों ने एक स्वर कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी पहचान है। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का स्वर है।भगवान बिरसा मुंडा जैसे महापुरुष और उनके संघर्षों को रंगमंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत सराहनीय कार्य है।हजारीबाग के कलाकारों ने जिस समर्पण, अनुशासन और जीवंत अभिनय के साथ यह प्रस्तुति दी है, वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा के योग्य है। ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक उत्कृष्टता की भावना को सशक्त बनाते हैं।इस अवसर पर तन्मय ग्रुप द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति नाटक "धरती आबा, वंदे मातरम" की अमर हुंकार ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लगभग 60 स्थानीय कलाकारों ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, आदिवासी अस्मिता, स्वजंता और जीवंतता तथा भक्ति की भावना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर जीवंत किया।नाटक के सफल निर्देशन का श्रेय दीपक कुमार को जाता है। उनके साथ अमित कुमार गुप्ता, सहायक निर्देशक सह सचिव, तरंग हजारीबाग, अमित कुमार और गुलशन कुमार ने सहायक निर्देशक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंच की भव्यता को मंजरा कुमारी ने चार चांद लगा दिए। वहीं, नृत्य निर्देशन का काम सुनील कुमार सोनी, बंटी सिंह और ललन कुमार ने संभाला, जिनकी कोरियोग्राफी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।प्रतिभाशाली अभिनय कला का जादू बिखेरने वाले प्रमुख कलाकारों में रेखा, अनुराधा कुमारी, राखी कुमारी, वर्षा कुमारी, निधि कुमारी, संजना कुमारी, चांदनी कुमारी, अंशिका राय, आराध्या राय, शिवानी पाण्डेय, अंबिका कुमारी, वैष्णवी, लक्ष्मी कुमारी, समता, रीपी कुमारी, अमरगुरु कुमार, अमित कुमार, पूजा कृति, संध्या कुमारी, आकांक्षा कुमारी, प्रिया शर्मा, मासूम सिंह, दीपिका मेहता, आयु कुमारी, तन्मय देव, मेघा राज, जानवी भारती, काजल कुमारी, नंदनी कुमारी, आराधी कश्यप, निशा भारती और यश राज प्रसाद शामिल रहे।कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवाद, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और मंच उपस्थिति से प्रत्येक दृश्य को जीवंत बना दिया। भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और राष्ट्रप्रेम के संदेश को उन्होंने इतनी प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया कि दर्शक हर समय नाटक से जुड़े रहे।
कई मार्मिक एवं प्रेरणादायी दृश्यों पर प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हिंदी एवं खोटा भाषा में प्रभावशाली संवाद, पारंपरिक लोक संगीत, आकर्षक नृत्य, उत्कृष्ट प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन तथा मंच सज्जा ने पूरे नाटक को अविस्मरणीय बना दिया।लगभग 60 कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि हजारीबाग की सांस्कृतिक धरती प्रतिभाओं से समृद्ध है।नाटक का संदेश केवल इतिहास का स्मरण कराना नहीं था, बल्कि युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक एकता, प्रकृति संरक्षण, आदिवासी गौरव तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी था।इस आयोजन की विशेष उपलब्धि यह रही कि देशभर के 150 से अधिक स्थानों पर इसे तरह के अनेक देशभक्ति नाटकों का एक साथ मंचन किया गया।कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा कलाकारों एवं आयोजन से जुड़ी सभी संस्थाओं को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" और राष्ट्रगान के साथ भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने का आह्वान किया।
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