कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण (हजारीबाग): विकास और प्रगति के तमाम दावों के बीच चौपारण प्रखंड की चोरदाहा पंचायत अंतर्गत झारखंड के अंतिम छोर पर बसा गढ़ मोरवा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है। यहां के ग्रामीण बिजली, शुद्ध पेयजल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
गांव में नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं महिलाओं को अंधेरे में ही घरेलू काम करने पड़ रहे हैं। पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों तक जाना पड़ता है। इससे उनका कीमती समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहा है।
सबसे बड़ी समस्या आंगनबाड़ी केंद्र की है। गांव में आंगनबाड़ी नहीं होने के कारण छोटे बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को सरकार की पोषण और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि गढ़ मोरवा गांव में अविलंब बिजली, शुद्ध पेयजल और आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव के लोग भी सम्मानजनक जीवन जी सकें।

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