New Delhi: सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम भारत की खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं करता है। इसका उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और किसानों को बेहतर प्रतिफल प्रदान करना है।
भारतीय खाद्य निगम के चावल का एथेनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने के संबंध में हालिया दावों पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि खाद्य सुरक्षा दायित्वों को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। मंत्रालय ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली के तहत खरीदे गए प्रत्येक अनाज को पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य बफर स्टॉक के लिए आवंटित किया जाता है। खाद्य सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा प्रमाणित अधिशेष स्टॉक को ही एथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमोदित किया जाता है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि क्षतिग्रस्त अनाज, टूटा हुआ चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न एथेनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल में शामिल हैं। इसकी वजह से अनुपयोगी स्टॉक को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करने में मदद मिलती है। देश प्रधानमंत्री जीवन योजना के तहत कृषि अवशेषों से द्वितीय पीढ़ी के इथेनॉल का उत्पादन भी बढ़ा रहा है, जिससे खाद्यान्नों पर निर्भरता कम हो रही है।
निगम ने चावल की कीमत के संबंध में सरकार ने कहा कि यह कई अनुमोदित कच्चे माल में से एक है और इथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने वाले अन्य कच्चे माल के समान ही मूल्य निर्धारण ढांचे के अंतर्गत आता है। सरकार ने बताया कि कार्यक्रम उपलब्धता के आधार पर अनुमोदित कच्चे माल के लचीले मिश्रण का उपयोग करने के लिए बनाया गया है और इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में इथेनॉल उत्पादन में एफसीआई चावल का हिस्सा नगण्य था। अधिशेष भंडार उपलब्ध होने के बाद ही इसका हिस्सा बढ़ा।
सरकार ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि इथेनॉल मिश्रण केवल करदाताओं के समर्थन से ही चल रहा है। सरकार ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना नहीं है कि इथेनॉल किसी भी दिन पेट्रोल से सस्ता हो, बल्कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं की रक्षा करना है। मंत्रालय के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 135 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तब इथेनॉल मिश्रण ने घरेलू ईंधन की कीमतों को तेज वृद्धि से बचाने में मदद की।
सरकार ने इस बात बताया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के परिणामस्वरूप अब तक एक लाख 97 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है । कच्चे तेल के आयात में 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक की कमी आई है। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक की कटौती हुई है और किसानों और डिस्टिलरों को एक लाख 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान प्राप्त हुआ है।

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