कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण, हजारीबाग : एक शिक्षक का भविष्य जब अंधकारमय था, जब बुढ़ापे की लाठी कही जाने वाली पेंशन छीन ली गई थी, तब एक आवाज ने उनके हक की लड़ाई लड़ी। वह आवाज थी स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू की। उनके आकस्मिक निधन से आज पूरा शिक्षक समाज खुद को अनाथ महसूस कर रहा है। इसी कृतज्ञता और शोक के भाव के साथ मंगलवार को चौपारण में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रखंड के शिक्षकों ने शशिकांत शर्मा के नेतृत्व में शामिल होकर अपने मसीहा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
जैसा कि पहली तस्वीर में दिख रहा है, शिक्षकों ने जो बैनर लगाया है उस पर साफ लिखा है - "राज्यकर्मियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली का मार्ग प्रशस्त करने वाले दिवंगत माननीय मंत्री श्री सुदिव्य कुमार जी को विनम्र श्रद्धांजलि"। यह बैनर केवल एक बैनर नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के दिल की आवाज है। तस्वीर में शशिकांत शर्मा सहित सभी शिक्षक नम आंखों से अपने नेता को नमन कर रहे हैं। दूसरी तस्वीर में एक शिक्षक उनके तैलचित्र पर, जो गेंदे के फूलों से सजा है, पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम प्रणाम कर रहे हैं। अगरबत्ती और दीये की रोशनी में पूरा माहौल गमगीन था। तीसरी तस्वीर में बड़ी संख्या में शिक्षक जमीन पर पालथी मारकर बैठे हैं, सिर झुकाए, मौन होकर अपने प्रिय नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अल्प सूचना के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों का जुटना, सुदिव्य सोनू के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।शिक्षकों ने कहा कि OPS लागू होने से राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को भविष्य की सुरक्षा मिली है। इस ऐतिहासिक निर्णय के पीछे स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे शिक्षक समुदाय ताउम्र याद रखेगा। शशिकांत शर्मा ने कहा कि अल्प सूचना के बावजूद कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी शिक्षकों के प्रति वे आभार व्यक्त करते हैं। यह सहभागिता ही सुदिव्य सोनू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर शशिकांत शर्मा, सुबोध कुमार सिंह, प्रतिमा राज, राजाराम रवि, अशोक कुमार दांगी, दीपक कुमार, विजय कुमार, अनुज प्रियदर्शी, राकेश कुमार, संजय कुमार, दीपक सिन्हा, ब्रजमोहन प्रसाद और किशोर प्रजापति समेत अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
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