कृष्णा कुमार कुशवाहा
चौपारण, हजारीबाग : सोमवार को विश्वामित्र नगरी कहे जाने वाले बारा गांव में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। करीब 35 वर्षीय रंजन सिंह की सड़क दुर्घटना में हुई मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को गहरे अंधेरे में धकेल दिया। बताया जा रहा है कि रंजन अपने करीब 70 वर्षीय पिता के साथ घर से पैदल निकले थे। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही कदम आगे मौत उनका इंतजार कर रही है। महूदी के पास पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार कंटेनर ने पिता-पुत्र को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रंजन गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके वृद्ध पिता के भी घायल होने की सूचना है।
दो बेटियां DAV में, 6 साल का बेटा... अब कौन देगा सहारा?
रंजन की मौत की खबर गांव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। लेकिन इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उनके तीन मासूम बच्चों की है। रंजन अपने पीछे दो बेटियां और महज 6 साल का एक बेटा छोड़ गए हैं। दोनों बेटियां स्थानीय डीएवी स्कूल में पढ़ती हैं। जिस उम्र में बेटियों को पिता का हाथ पकड़कर स्कूल जाना था और बेटे को पिता की उंगली पकड़कर दुनिया समझनी थी, उस उम्र में उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
आक्रोश, जाम और पुलिस:
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने महूदी में सड़क जाम कर दिया। सूचना पर चौपारण थाना प्रभारी पंकज कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। पुलिस ने कंटेनर को जब्त कर लिया है।
सवाल जो बाकी है:
चौपारण में सड़क हादसे अब कोई नई बात नहीं रह गए हैं। GT Road / NH पर तेज रफ्तार और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण आए दिन परिवार उजड़ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि एनएचएआई और परिवहन विभाग कब जागेगा? सड़क पर स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कब होंगे? जो चला गया वो वापस नहीं आएगा, लेकिन क्या अगला रंजन बचाया जा सकता है? यह सवाल आज बारा गांव के हर आंख में है।

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