Hot Posts

6/recent/ticker-posts

JPSC की ‘रेट लिस्ट’ का बड़ा खुलासा! PT पास कराने के ₹5 लाख, फाइनल सिलेक्शन के लिए ₹25 लाख तक की कथित वसूली



रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित धांधली की जांच कर रही CID ने कोर्ट में कई गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। तत्कालीन JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की जमानत याचिका का विरोध करते हुए जांच एजेंसी ने हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें अधिकारियों, बिचौलियों और परीक्षा एजेंसी के कथित गठजोड़ की बात कही गई है।

पूर्व अध्यक्ष पर डिजिटल सबूत मिटाने का आरोप

CID के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को JPSC में छापेमारी के बाद तत्कालीन चेयरमैन ने पद से इस्तीफा दिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव से महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा हटाया गया तथा हार्ड डिस्क को नुकसान पहुंचाकर कथित तौर पर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई। CID ने पूर्व अध्यक्ष और कथित बिचौलियों के बीच संदिग्ध वित्तीय लेनदेन एवं कॉल डिटेल मिलने का भी दावा किया है।

500 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़ का दावा

जांच में CID ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विभिन्न परीक्षाओं की 500 से अधिक OMR शीट में कथित तौर पर हेरफेर किया गया।

फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा: 350 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़

असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट परीक्षा: 150 से अधिक OMR शीट में कथित हेरफेर

PT से फाइनल सिलेक्शन तक कथित ‘रेट लिस्ट’

CID के हलफनामे के अनुसार, कथित सिंडिकेट अभ्यर्थियों से अलग-अलग स्तर पर रकम वसूलता था।

PT पास कराने के लिए: ₹5 लाख तक

फाइनल सिलेक्शन के लिए: ₹10 लाख से ₹25 लाख तक

जांच एजेंसी के अनुसार, रकम की कथित गारंटी के तौर पर कुछ अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज, ब्लैंक साइन किए हुए चेक और स्टाम्प पेपर भी रखे जाते थे।

 ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को काम देने पर भी सवाल

हलफनामे में यह भी सवाल उठाया गया है कि JSSC द्वारा मई 2025 में ब्लैकलिस्ट की गई TDPL कंपनी को कथित तौर पर जून 2025 में JPSC परीक्षाओं से जुड़ा काम कैसे सौंपा गया।

 सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम

CID के इन दावों के बाद JPSC परीक्षा प्रक्रिया और चयन प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े अधिकारियों, बिचौलियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

नोट: ये सभी आरोप CID द्वारा जांच और कोर्ट में दाखिल हलफनामे के आधार पर बताए गए हैं। मामले में अंतिम सत्य और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।


Post a Comment

0 Comments